Tuesday, February 1, 2011

प्याज



प्याज काटो
तो रुलाता है
बड़े बड़ों को
आँखें दिखाता है
दुलहन कैसी
भी हो चलेगी
प्याज बिन
अब ना ये जिन्दगी निभेगी
प्रेमी बोलें,
जानेबहार !
अब मुझे कुछ भाता नही है
प्याज के सिवा
अब कुछ रास आता नही
अब तो तेरे भाव भी
जमीन पे नही पाए जाते है
आँखों के
आंसू भी
तेरी याद में छलकाए नही जाते
अब लड़की
हर लड़के से
यही बोले
प्यार उसी से
जो उसे प्याज के तोहफे में तोले
पत्नी के
मुख में अब ना रही है
लगाम
अब पति देव
तुझे नही प्याज को है
"सलाम"
अब वही दोस्त है
अपना
जो दिखाए
प्याज का देने का
सपना
अब नेताओं के भाषण में प्याज नज़र आने लगा है
चुनाव चिन्ह प्याज होने का जुगत नेता लगाने लगा है


"हे प्याज देवता" तू तो राजाओं की तरह सज रहा है
तेरे चक्कर में बहुतों का बाजा जोरों से बज रहा है || 

12 comments:

  1. अच्छी कविता है .सुन्दर कटाक्ष

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  2. आपकी उम्दा प्रस्तुति कल शनिवार ०५.०२.२०११ को "चर्चा मंच" पर प्रस्तुत की गयी है।आप आये और आकर अपने विचारों से हमे अवगत कराये......"ॐ साई राम" at http://charchamanch.uchcharan.com/
    चर्चाकार:Er. सत्यम शिवम (शनिवासरीय चर्चा)

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  3. er satyam shivam ji aapko meri rachna pasand ayi shukria kintu aapne kaha jo ki yeh


    पकी उम्दा प्रस्तुति कल शनिवार ०५.०२.२०११ को "चर्चा मंच" पर प्रस्तुत की गयी है।आप आये और आकर अपने विचारों से हमे अवगत कराये......"ॐ साई राम" at http://charchamanch.uchcharan.com/
    चर्चाकार:Er. सत्यम शिवम (शनिवासरीय चर्चा)
    to mujhe kaise ana hoga samjhi nahin segebob ji aapka bhi shukria

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  4. आपको चर्चा मंच पर आ अपने कामेंट द्वारा बताना होगा....कैसा लगा हमारा चर्चा आपको....तो कल आप जरुर आये
    at http://charchamanch.uchcharan.com/

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  5. pyaz per bhi kavita likh lee.bahut achchi laga.

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  6. ग़ज़ब का व्यग...सुन्दर कटाक्ष ....लाजवाब, सुन्दर लेखनी को आभार...

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  7. :) :) अच्छा व्यंग


    कृपया वर्ड वेरिफिकेशन हटा लें ...टिप्पणीकर्ता को सरलता होगी ...

    वर्ड वेरिफिकेशन हटाने के लिए
    डैशबोर्ड > सेटिंग्स > कमेंट्स > वर्ड वेरिफिकेशन को नो करें ..सेव करें ..बस हो गया .

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  8. ये प्याज की माया भी अजब है ... कितनों को रुलाता है ...
    अच्छा व्यंग है ...

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  9. Khoob vyang kiya hai, Jyotiji. mubarak ho.

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  10. लाजवाब व्यग...सुन्दर कटाक्ष ....,
    सुन्दर लेखनी को आभार...

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  11. सामयिक परिपेक्ष्य में एक चपटा व्यंग.

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