Wednesday, August 3, 2011

लिखी ग़ज़ल आज दिल जलाने के बाद

फिर लिखी ग़ज़ल आज दिल जलाने के बाद
दुनिया हुई वीरान आज उनको भुलाने के बाद

खोये खोये से वो हैं खोयी खोयी सी कायनात
बरसात भी रो रही आज उनके जाने के बाद

दिल इस कदर जला मेरा राख भी न नसीब हुई
कलेजे में ठंडक मिली हो जैसे एक ज़माने के बाद

ऐतबार अपने दिल पर इस कदर करते रहे
सब कुछ लुटा के चल दिए घर जलाने के बाद

वो उनकी तर्के-मुहब्बत थीं मेरी जफ़ा नहीं
सरे-मज़हर नीलाम कर दिया छोड़ जाने के बाद

मुहब्बत में हर कस्में निबाह लेती "ए ज्योति"
वो बेवफा कह गए प्यार में मुझे हराने के बाद 

10 comments:

  1. दिल इस कदर जला मेरा राख भी न नसीब हुई
    कलेजे में ठंडक मिली हो जैसे एक ज़माने के बाद
    laajwaaaaaaaaab
    jai hind jai bharat

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  2. ऐतबार अपने दिल पर इस कदर करते रहे
    सब कुछ लुटा के चल दिए घर जलाने के बाद...बहुत सुन्दर...

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  3. मुहब्बत में हर कस्में निबाह लेती "ए ज्योति"
    वो बेवफा कह गए प्यार में मुझे हराने के बाद

    बहुत खूबसूरती से लिखा है ..




    कृपया टिप्पणी बॉक्स से वर्ड वेरिफिकेशन हटा लें ...टिप्पणीकर्ता को सरलता होगी ...

    वर्ड वेरिफिकेशन हटाने के लिए
    डैशबोर्ड > सेटिंग्स > कमेंट्स > वर्ड वेरिफिकेशन को नो करें ..सेव करें ..बस हो गया .

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  4. बहुत सुन्दर रचना , बहुत खूबसूरत भावाभिव्यक्ति

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  5. आपकी इस पोस्ट की हलचल आज यहाँ भी है

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  6. भावपूर्ण सुन्दर रचना |
    बधाई |
    आशा

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  7. लाजबाब और उम्दा गजल ...

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