Tuesday, August 9, 2011

माँ बाप को वृदाश्रम का रास्ता दिखाते हैं

ड्राइंग रूम में अपने कैकटस सजाते हैं
बूढ़े माँ बाप को घर के बाहर बिठाते हैं

घर में खाना देते कुत्तों को हाथों से
बूढ़े माँ बाप को खाने के लिए तरसाते हैं

सुलाते मखमली गद्दों पे पालतू पिल्लों को
माँ बाप को वृदाश्रम का रास्ता दिखाते हैं

गाली निकालते रहते हर वक़्त देश को
खुद हर काम के लिए घूस खिलाते हैं

स्विस बैंक के खाते फुल नेताओं के
मंहगाई के नाम से ग़रीबों को मरवाते हैं

मरता है सारा दिन ग़रीब रोटी के लिए
नेता जनता के पैसे से घर बनवाते हैं

11 comments:

  1. घर में खाना देते कुत्तों को हाथों से
    बूढ़े माँ बाप को खाने के लिए तरसाते हैं
    सार्थक लेखनी ....सटीक विश्लेषण रिश्तो पर

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  2. Bilkul sahi likha hai apne,,
    sarthak rachna,
    jai hind jai bharatBilkul sahi likha hai apne,,
    sarthak rachna,
    jai hind jai bharat

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  3. यथार्थ को कहती ... संवेदनशील रचना ..कहीं कहीं अति हो जाती है .




    कृपया टिप्पणी बॉक्स से वर्ड वेरिफिकेशन हटा लें ...टिप्पणीकर्ता को सरलता होगी ...

    वर्ड वेरिफिकेशन हटाने के लिए
    डैशबोर्ड > सेटिंग्स > कमेंट्स > वर्ड वेरिफिकेशन को नो करें ..सेव करें ..बस हो गया .

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  4. आपकी किसी नयी -पुरानी पोस्ट की हल चल कल 11 - 08 - 2011 को यहाँ भी है

    नयी पुरानी हल चल में आज- समंदर इतना खारा क्यों है -

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  5. बहुत सुन्दर रचना , बहुत खूबसूरत प्रस्तुति आभार

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  6. वाकई दुर्भाग्यपूर्ण है ...कुत्ते बिल्लियों पर प्यार लुटाने वाले माँ बाप को भूल जाते हैं !
    संवेदनशील मन की अभिव्यक्ति !

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  7. यथार्थ का सटीक चित्रण ।

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  8. This is a really excellent read for me. Must agree that you are one of the coolest bloggers.

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  9. रक्षाबंधन एवं स्वतंत्रता दिवस पर्वों की हार्दिक शुभकामनाएं .

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