Friday, November 25, 2011

सब कुछ बदल गया वक़्त बदलते बदलते

सब कुछ बदल गया वक़्त बदलते बदलते 
सच्च जो भ्रम था वो बदल गया वक़्त बदलते बदलते

एक मुस्कान जो खिलती थी सुबह की किरन सी 
आज वो भी बदल गई वक़्त बदलते बदलते 

आँखें कहती हैं ठहर जा ,अभी न छलक
आज फिर आँखें छलक गई वक़्त बदलते बदलते 

रात की चांदनी छिड़कती है ठंडी हवाओं संग 
आज रात बदल गई वक़्त बदलते बदलते 

झूठ था जो वडा निभाया था तुमने 
आज तुम बदल गए वक़्त बदलते बदलते

'ज्योति' की कश्ती में आंसुओं का दरिया है 
आज साहिल बदल गया वक़्त बदलते बदलते 

14 comments:

  1. रात की चांदनी छिड़कती है ठंडी हवाओं संग
    आज रात बदल गई वक़्त बदलते बदलते

    बहुत खूब.
    खूबसूरत अलफ़ाज़.
    खूबसूरत पेशकश.

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  2. खूबसूरत गज़ल ..सब कुछ बादल जाता है वक्त बदलते बदलते

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  3. sab kuch badal gaya....waqt ke sath

    bahut khub abhivyakti.....aabhar

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  4. बेहतरीन शब्द समायोजन..... भावपूर्ण अभिवयक्ति....

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  5. आँखें कहती हैं ठहर जा ,अभी न छलक
    आज फिर आँखें छलक गई वक़्त बदलते बदलते

    ....बेहतरीन गज़ल...

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  6. खूबसूरत गज़ल .....

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  7. आपकी इस सुन्दर प्रविष्टि की चर्चा कल सोमवारीय चर्चामंच http://charchamanch.blogspot.com/ पर भी होगी। सूचनार्थ

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  8. बहुत ख़ूबसूरत पोस्ट, बधाई.

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  9. खूबसूरत भाव है आपकी रचना के. आभार.

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  10. ज्योति' की कश्ती में आंसुओं का दरिया है
    आज साहिल बदल गया वक़्त बदलते बदलते ...sabkuch kya se kya ho gaya !

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  11. आँखें कहती हैं ठहर जा ,अभी न छलक
    आज फिर आँखें छलक गई वक़्त बदलते बदलते

    आपकी इस रचना का हर लफ्ज बहुत कुछ कहता है .....सच में मैं भी रुक गया कुछ कहते कहते ......!

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  12. ्वक्त सब बदल देता है ………सुन्दर भाव संजोये हैं।

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  13. अच्छे खयालात... सुन्दर प्रस्तुति...
    सादर...

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  14. वक्त बदलते सब कुछ बदल जाता है । हम भी तो ।

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