Thursday, September 30, 2010

तेरे सपनों मे खो जाऊँ

दिल करता है सो जाऊँ
तेरे सपनों मे खो जाऊ
आज तू मुझे अपना ले
मैं दुल्हन सी हो जाऊँ
आगोश मे भर ले मुझे
तुम मेरे हो जाओ
मैं तेरी हो जाऊँ
चुन लो तुम मुझे
बिखर गई हूँ मैं मोतियों जैसे
आज तुम भी बिखर जाओ
मेरी जुलफो मे समा जाओ
मेरे माथे की बिंदिया बन जाओ
माँग मे सिंधूर की लालिमा बन जाओ
होठों का हर रंग चुरा लो तुम
मेरी जिंदगी मे शामिल हो जाओ तुम
इस सपने को हक़ीकत बना दो तुम
तुम मेरे हमसफ़रबन जाओ
मैं तेरी जीवन संगनी बन जाऊँ

Wednesday, September 29, 2010

लिखा क्या उसने , माथे पे इन्सान के!!

खुदा उतर आया इस ,
धरती पर उस आसमान से!!
लिखा  क्या  उसने ,
माथे पे  इन्सान के!!
हिंदू, मुसलमान ये,
सिख, ईसाई है ये ,
हैं सब उस भगवान के!!
घरों की दीवारों  पे,
लिखो राम या रहीम,
वहेगुरू या यीशू मसीह!!
हैं तो सब नाम,
उस  भगवान  के!!
मंदिर  रहे  या,
 मस्जिद    बने!!
गुरुद्वारा हो कहीं,
या गिरजा हो कहीं!!
हैं यह सारे स्थल उस,
एक शक्ति के नाम के!!

गरीबी

घर से बाहर निकली!
एक छोटी सी लड़की मिली!
तन पे कपड़ों के नाम पे चिथड़े थे!
पाओं में टूटी सी चप्पल थी!
चेहरे पे मासूमियत थी!
हाथ माँगने के लिए उठे थे!
आँखों में एक आस थी!
आज भी कुछ मिलेगा!
जिंदगी का कुछ वक़त,
तो  अच्छा  गुजरेगा!
दिल से एक हुक उठी!
हे परमात्मा मैने तुम्हे,
एक चिट्ठी लिखी!
कैसी है तेरी खुदाई!
तुमने यह कैसी दुनिया बनाई!
कहीं खाने, पहनने, रहने के,
लाखों साधन पड़े हैं!
कहीं एक रोटी के टुकड़े के.
लिए माँगना पड़ता है!
तुमने यह दुनिया ही क्यूँ बनाई!
तुझे ज़रा सी दया भी ना आई!

Tuesday, September 28, 2010

कुछ स्कून तो, इस जिन्दगी को दिलादे

तू कितना चाहता है मुझे,
अब तू यह भी बता दे!!

मेरे दिल में खोए से,
अल्फ़ाज़ फिर से जगा दे!!

खवाबों की दुनिया को ,
सज़ाया था मैने तू,
उसे हक़ीकत बना दे!!

जिन अरमानों को मैंने,
खाक में मिलाया था,
उनको नई जिन्दगी देदे!!

रहनुमा बनके जिन्दगी का,
तू प्यार का रास्ता दिखा दे!!

हालत-ए-जफ़ाओं से थक चुकी हूं,
आके तू कुछ स्कून तो,
इस जिन्दगी को दिलादे

भूल गये हैं

दिल टूटा है किसी का
आँसू इन आँखों मे आना भूल गये हैं
साँसें तो हैं पर साँस लेना भूल गये हैं
जिंदा तो हैं पर जिंदगी जीना भूल गये हैं
प्यार तो है दिल मे पर प्यार करना भूल गये हैं
बातें तो बहुत हैं पर बातें करना भूल गये हैं
फीकी सी हँसी है इन होठों पे
पर मुस्कुराना भूल गये हैं
यादें किसी और की हैं
मुझे अपनी यादों का हिस्सा बनाना भूल गये हैं
उसके दिल के किसी कोने मे में हू
वो मेरे दिल मे आना भूल गये हैं
प्यार करना तो दूर
नाम भी भूल गये हैं
घाव तो बहुत दिए दुनिया ने
खुद ही मरहम लगाना भी भूल गये हैं

Saturday, September 25, 2010

यह कच्चे धागे से जुड़े रिश्ते

राखी का दिन आया
खुशियाँ ढेर सारी लाया
कुछ के लिए गम भी लाया!!
आज कुछ आँखें हैं नम
दिल में छिपाए ढेर सारे गम!!
कहीं बहने रोती राखी बाँधने को
कहीं भाई तरसते राखी बंधवाने को!!
आज यह रिश्ते भूल गये
राखी दिवस को
उस के अपनत्व को!!
राखी दिवस को तोल दिया पैसों से
राखी के धागे को रोंध दिया,
अपने अहंकार के पायों से!!
यह मतलब की दुनिया
यह मतलब के रिश्ते
यह कच्चे धागे से जुड़े रिश्ते!!
क्यूँ टूट जाते हैं कुछ बातों से,
क्यूँ बिखर जाते हैं कुछ पल में!!

हसरत

कितनी हसरत थी
प्यार में खो जाने की

कितनी हसरत थी
प्यार में डूब जाने की

कितनी हसरत थी
प्यार को अपना बनाने की

कितनी हसरत थी
प्यार को पवित्र बनाने की

कितनी हसरत थी
प्यार को खुदा बनाने की